आश्चर्य किन्तु सत्य

आज विश्व में जावन प्रजाति के गैंडों की संख्या मात्र 100 रह गई है !
न्यू गिनी द्वीप पर पक्षियों की कई ऐसी प्रजातियाँ पाई जाती है जिनके पंखों में ज़हर होता है !
कई बार व्यक्ति कलाकार न होते हुए भी कई महत्त्व पूर्ण कम कर जाता है जिससे वह इतिहास में जगह बना लेते है ! चीन के शैनड़ोंग आर्ट्स महाविधालय के एक अध्यापक ने 2007 में शैनड़ोंग म्यूजियम में फ़ॉसिल नामक अपनी कलाकृति का प्रदर्शन किया था जो पुराने कम्पूटर के पुर्जों की मदद से बनाई गई थी ! इसे अब aap क्या कहेगे !

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About रौशन जसवाल विक्षिप्‍त

अपने बारे में कुछ भी खास नहीं है बस आम और साधारण ही है! साहित्य में रुचि है! पढ लेता हूं कभी कभार लिख लेता हूं ! कभी प्रकाशनार्थ भेज भी देता हूं! वैसे 1986से यदाकदा प्रकाशित हो रहा हूं! छिट पुट संकलित और पुरुस्कृत भी हुआ हूं! आकाशवाणी शिमला और दूरदर्शन शिमला से नैमितिक सम्बंध रहा है! सम्‍प्रति : अध्‍यापन

7 thoughts on “आश्चर्य किन्तु सत्य

  1. S B Tamare

    सर ,
    पीछे कई बार आपके ब्लॉग पर टिपण्णी करनी चाही परन्तु आपके वर्ड भेरिफिकेशन के शब्द कट जाते है और लाख कोशिशो के बाद भी सफलता नहीं मिली लिहाजा कुछ करे अन्यथा दूसरो को परेशानी होगी / थैंक्स /

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  2. aarkay

    महत्वपूर्ण एवं रोचक जानकारी , परन्तु गैंडा व बाघ अदि वन्य प्राणियों की घटती संख्या वास्तव में ही चिंता का विषय है. प्राकृतिक संतुलन बनाये रखने के लिए इन प्रजातियों का संरक्षण अनियार्य है.

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