कहानियां हमारे आस पास ही तो है



कहानियां हमारे आस पास ही तो होती है ! स्वार्थ में आदमी अक्सर अँधा हो जाता है ! अपने स्वार्थ के वो कुछ भी कर बेठता है ! यूँ तो टी वी पर चलने वाले धारावाहिक सास बहु के किस्सों पर ही होते है इन धारावाहिकों में मेरी कोई रूचि भी नहीं है ! तभी तो रिमोट पर मेरी उंगलियाँ समाचार चैनल की तरफ ही जाती है !आजकल जी टीवी पर चल रहे एक धारावाहिक ने मुझे अनायास ही आकर्षित किया है ! “अगले जन्म मोहे बिटिया ही कीजो ” इस धारावाहिक को देख कर मुझे एकाएक रांगेय राघव और फणीश्वर नाथ रेणू की रचनाओं की याद आ गई ! धारावाहिक मुझे जीवन और संवेदनाओं के बहुत ही पास लगा ! परिवार चलाने के लडके की ज़रूरत होती है और इसके लिए हम क्या क्या कर डालते है वास्तव में सोचनीय विषय है ! इस पुरुष प्रधान समाज में लड़कियाँ यह सब कब तक सेहती रहेगी? इस असत्य को हम स्वीकार करने में क्यों पींठ फेर लेते है ! धारावाहिक देख कर सोचता रहा की इसका शीर्षक होना चाहिए था “अगले जन्म मोहे बिटिया ना कीजो ” ! इतिहास गवाह है की प्राचीन भारत में अनेको महिलाओं ने अपनी विद्वता के बल पर पुरुषों को टक्कर दी है ! तो आज इस आधुनिक युग में हमारी सोच इतनी संकुचित क्यों हो गई ! अक्सर माँ मां कहती रहती है बेटा तेरे बुढापे में यही बेटियाँ ही सहारा बनेगी ! एक सच हमारे सामने ही तो है फिर स्वीकारने में इतनी आनाकानी क्यों?